बिहार सरकार द्वारा तरूणमित्रा, हिन्दी दैनिक समाचार पत्रा के सम्पादक को सूचना जन सम्पर्क विभाग के काले भ्रष्टाचार भरे कारनामों के भंड़ापफोड़ करने लगातार प्रकाशित करने के प्रतिशोध् में झूठे आरोप हथकड़ी लगा कर जेल भेजने के बाद डेमोक्रेटिक मिशन का प्रकाशन, श्री अखिलेश द्वारा 2008 में पटना से प्रारंभ किया गया।
इस पत्रिका के प्रकाशन का प्रमुख कारण मीडिया में बुरी तरह व्याप्त जातिवाद- भ्रष्टाचार-शोषण-लूट और उनके सरकारी संरक्षण के साथ-साथ पत्राकारिता के नाम पर चाटुकारिता, दलाली, ब्लैकमेलिंग के विरुद्ध उठाया एक कदम है। सम्पादक के विचार में पत्राकारिता और राजनीति मात्रा पेट पालने के लिये किया गया उधम या व्यापार नहीं है। पेट पालने के लिये और भी रास्ते हैं। पेट के लिये इन दोनों की पवित्राता भंग करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिये।
आज राजनीति और पत्राकारिता दोनों की गरिमा और शाख दिनों दिन गिर रही है। इसे व्यापारियों द्वारा सिर्फ व्यापार और अपने वैध-अवैध व्यापार के सुरक्षा का कवच बना दिया गया है।
आज ज्यादातर मिडीया देश के बड़े लूटेरे व्यापारियों, मापिफयाओं, तस्करों के पैसे से चल रहे हैं। जिसके कारण वे राजनीति में अपनी पैठ बना कर अपनी मनमानी कर-करा सकें। कलम गुलाम बन चुकी है। पेड मीडिया का दौर चल पड़ा है ये प्रजातंत्रा का दुश्मन बन चुका है और यही देश के लिये बहुत ही घातक है। देश का हर बुद्धिजीवी बुरी तरह मिडीया के इस चरित्रा पर चकित है।
सम्पादक के नजर में हर बुरी चीज का विरोध होना अत्यावश्यक है। वर्ना एक दिन हद से आगे निकल जायेगा। जैसे अगर हम अपने बच्चों को किसी गलत हरकत पर विरोध् नहीं करेंगे तो वह दुसरी बार उससे ज्यादा खतरनाक हरकत कर सकता है।
एक लम्बे समय से सच का प्रकाशन हमारे लिये काभी कठिन जीवन जीने के लिये मजबूर कर रहा है। सत्य को पसंद करने वाले भी हमारा प्रत्यक्ष साथ देने में दूर भाग रहे है। परन्तु उनके दिलों में हमारे लिये प्यार है, यह हमने पाया है। कटु सत्य होता है। परन्तु लाभदायक भी इसे सहन करने भर की हिम्मत होनी चाहिये। आप पाठकों के चाहत और आर्शिवाद से हमारी यह सड़ी-गली व्यवस्था की बह रही धरा को सही दिशा में एक मोड़ देने भर का एक प्रयास हैं। जिसमें हमें सफलता के सुबह की एक धुंध दिख रही है।
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